Women Safety Ranking: भारत में महिलाओं की सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है।
अब हाल ही में जारी एक बड़ी राष्ट्रीय रिपोर्ट ने इस चिंता को सच साबित कर दिया है।
‘नारी-2025’ (NARI-2025) नाम की इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश की 40% महिलाएं खुद को असुरक्षित या कम सुरक्षित महसूस करती हैं।
यह रिपोर्ट देश के 31 बड़े शहरों की 12,770 महिलाओं से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है, जो इसे और भी भरोसेमंद बनाती है।
कौन से हैं सबसे असुरक्षित शहर?
रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले नतीजों में से एक है शहरों की सुरक्षा रैंकिंग।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली, पटना, जयपुर और रांची जैसे बड़े शहर महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित पाए गए हैं। इन्हें रैंकिंग में ‘काफी नीचे’ की श्रेणी में रखा गया है।
कौन से हैं सबसे सुरक्षित शहर?
विशाखापत्तनम, मुंबई, भुवनेश्वर और कोहिमा जैसे शहर महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित शहरों की लिस्ट में शामिल हैं।
कोहिमा तो इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां 80% से ज्यादा महिलाएं खुद को पूरी तरह सुरक्षित मानती हैं।

आखिर क्यों महसूस होती है असुरक्षा?
रिपोर्ट में महिलाओं की इस असुरक्षा की भावना के पीछे कई बड़े कारण बताए गए हैं:
- शाम ढलते ही बढ़ जाता है डर: जैसे-जैसे शाम होती है, सड़कों पर रोशनी की कमी और पुलिस की गैर-मौजूदगी महिलाओं के डर को और बढ़ा देती है।
- छेड़छाड़ और अश्लील टिप्पणियां: सार्वजनिक जगहों जैसे बस, मेट्रो, बाजार आदि में छेड़खानी, घूरने और गलत टिप्पणियाँ एक आम समस्या बनी हुई है।
- खराब बुनियादी ढांचा: टूटी-फूटी सड़कें, अंधेरी गलियाँ और सार्वजनिक शौचालयों की कमी भी असुरक्षा की भावना पैदा करती है।
- कमजोर संस्थागत प्रतिक्रिया: महिलाओं को अधिकारियों और पुलिस पर भरोसा नहीं है। रिपोर्ट में सामने आया कि सिर्फ 25% महिलाओं को ही विश्वास है कि उनकी सुरक्षा संबंधी शिकायत पर सही कार्रवाई होगी।

सुरक्षित शहरों का क्या है राज?
विशाखापत्तनम और मुंबई जैसे शहरों ने सुरक्षा के मामले में शीर्ष स्थान हासिल करने के पीछे कई अहम कारण हैं:
- मजबूत लैंगिक समानता: इन शहरों में महिलाओं और पुरुषों को बराबरी की नजर से देखा जाता है।
- बेहतर शहरी ढाँचा: अच्छी रोशनी, साफ-सुथरे और भीड़-भाड़ वाले इलाके सुरक्षा की भावना बढ़ाते हैं।
- प्रभावी पुलिस व्यवस्था: पुलिस की तेज और कारगर प्रतिक्रिया लोगों का भरोसा बढ़ाती है।
- नागरिकों की सक्रिय भागीदारी: समाज का जागरूक होना और मदद के लिए आगे आना बेहद जरूरी है।

एक और बड़ी चिंता: शिकायत न दर्ज कराना
रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू यह है कि हर तीन में से दो महिलाएं उत्पीड़न की घटना की शिकायत तक दर्ज नहीं करातीं।
ऐसा शर्मिंदगी, सामाजिक दबाव या अधिकारियों पर अविश्वास के कारण होता है।
इसका सीधा मतलब है कि एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के आधिकारिक आंकड़े असलियत का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा दिखाते हैं।

‘नारी-2025’ रिपोर्ट एक चेतावनी की तरह है। यह साफ करती है कि महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है।
जरूरत है उन कानूनों को ठीक से लागू करने की, समाज की सोच बदलने की और शहरों का ढाँचा महिला-अनुकूल बनाने की। ज
ब तक महिलाएं बिना डर के अपने शहर में आजादी से सांस नहीं ले पाएंगी, तब तक देश की असली प्रगति अधूरी ही रहेगी।